
जंगल वॉरफेयर कॉलेज में ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
कांकेर : छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अचूक प्लान और जवानों को मुश्किल परिस्थियों में डटे रहने का तरीका जंगल वॉरफेयर कॉलेज में सिखाया जाता है. इस कॉलेज के संस्थापक और पूर्व निदेशक स्वर्गीय ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार को परिसर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई.इस दौरान श्रद्धांजलि देने पहुंचे उनके जूनियर और वक्ताओं ने जंगल वॉरफेयर कॉलेज और ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार के महत्व को बताया. शोक सभा में ब्रिगेडियर पोनवार के छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण में दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया.
कौन थे ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार
ब्रिगेडियर पोनवार ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बांग्लादेश की मुक्ति में भी बसंत कुमार पोनवार का बहुमूल्य योगदान था. ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार केवल एक प्रशिक्षक नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायी मार्गदर्शक थे. राष्ट्र की सुरक्षा, छत्तीसगढ़ में शांति स्थापना और नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए उनके किए गए कार्य सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे. उनके योगदान को सुरक्षा बल और पूरा प्रदेश हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करेगा.

जंगल वॉरफेयरकॉलेज ने निभाई अहम भूमिका (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

संस्थापक को दी गई श्रद्धांजलि (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
क्या है जंगल वॉरफेयर कॉलेज ?
इस अवसर पर कॉलेज के निदेशक एस.के. लामा, सेनानी शंकर लाल बघेल सहित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने शोक सभा आयोजित कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि एक समय बस्तर क्षेत्र नक्सल हिंसा से गंभीर रूप से प्रभावित था. ऐसे कठिन दौर में राज्य सरकार ने अनुभवी सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार को गोरिल्ला युद्ध प्रशिक्षण की जिम्मेदारी सौंपी.

ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार को दी गई श्रद्धांजलि (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

पोनवार के योगदान को किया गया याद (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार ने रखी थी नींव (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
सेना से रिटायर होने के बाद ली बड़ी जिम्मेदारी
1 अप्रैल 2005 को भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने जंगल वॉरफेयर कॉलेज, कांकेर का कार्यभार संभाला. उस समय प्रशिक्षण के लिए आवश्यक संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं का अभाव था, लेकिन उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, अनुशासन और अथक मेहनत से मात्र तीन महीने में प्रशिक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार कर दीं. इसके बाद अगस्त 2005 में पहले प्रशिक्षण बैच की शुरुआत हुई.

गोरिल्ला वार में जवानों को किया निपुण (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

44 हजार से ज्यादा जवानों को किया ट्रेंड (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
44 हजार से ज्यादा जवान हुए ट्रेंड
ब्रिगेडियर पोनवार के नेतृत्व में अब तक छत्तीसगढ़ पुलिस, नक्सल प्रभावित राज्यों की पुलिस, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, आरपीएफ, एनएसजी और भारतीय सेना के लगभग 44 हजार जवानों को गोरिल्ला वारफेयर और नक्सल विरोधी अभियानों का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है.उनके प्रशिक्षण ने सुरक्षा बलों की क्षमता, आत्मविश्वास और अभियान संचालन की दक्षता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा
